झूठी सगाई, सच्चा प्यार
अपनी बहन को पूर्व प्रेमी से शादी करते देखने से बचने के लिए नायिका अपने अरबपति दोस्त को मंगेतर बताने का नाटक करती है। दोस्त भी उसकी खातिर इस झूठ में साथ देता है। बहन की साज़िशों, पूर्व प्रेमी की दीवानगी और पिता की बेरुखी के बीच दोनों के पांच साल पुराने दबे जज़्बात सामने आने लगते हैं। नायिका को अपने साथ हुए दुर्व्यवहार और परिवार द्वारा छिपाए गए सच का सामना करना पड़ता है, जबकि नायक भी अपने पारिवारिक जख्मों से जूझता है। दूर जाने के बाद नायिका लौट आती है। नायक अपनी मां की अंगूठी से उसे शादी के लिए प्रपोज करता है और दोनों सब कुछ पीछे छोड़कर नई जिंदगी चुनते हैं।